अब तुझसे हिन् आस है.
तुझमें हिन् विश्वाश है.
दे वरदान वीरता का
प्रकशित कर दे
विजय पथ हमारा.
यही है आराधना
छोटी सी है प्रार्थना
सवार हो सूर्य किरणों पर.
विजित करें हम आपना लक्ष्य.
यह कविता २७ अगस्त २००७ को लिखी गयी थी.
श्याम किशोर शर्मा.
Thursday, March 11, 2010
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