Thursday, March 11, 2010

कभी तो सुबह होगी

क्या कहें अपने दिल का हाल..
बस...सिकुड़ के रह गए हैं...
सूखे गुलाब की तरह...
इस इंतजार में..
की कभी तो सुबह होगी..!!
हमारे आशिकी के आंगन में..!!!

दीवानेपन की क्या ...?
जैसे हो स्वाति के बूंदों की प्यास
या हो धूमिल क्षितिज में धूसरित,
होने की अभिलाष..!!!

खैर हैं बहुत किये इंतजार ,
किया सूनेपन में बिश्वास...!
यह सोच कर...
की कभी तो सुबह होगी...!!!

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