Monday, March 23, 2009

इश्क

दिल की एक आवाज सुन ..
सुन ऐए मेरी भी एक बात सुन ...

भावनाओ के समुंदर ...
मैं बहते ... भटकते रूह की आवाज़ सुन ....

सुन ....ऐए पथिक ...
मेरी भी एक फरियाद सुन ....

तुझसे रुखसत का आलम ....
मेरी बेबसी का ये गम
कर तो क्या करें ...
कहें तो क्या कहें हम !

बरबस
एक ख्याल आया,
जहाँ भी देखा ..जब भी सोचा ....
तुम्हे हिन् क्यों पाया !!!!

ऐए अजनबी ...
इस सोंच की रवानगी को ..
श्याम की दीवानगी को
दीपो की रौशनी दे...!!!

यह कविता फ़रवरी २००६ मैं लिखी गयी थी.

श्याम किशोर शर्मा.

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